श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.25

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स बद्धहृदयस्तस्मिन्‍नर्भके कलभाषिणि।

निरीक्षमाणस्तल्लीलां मुमुदे जरठो भृशम्॥ २५

sa baddhahṛdayastasminnarbhake kalabhāṣiṇi|

nirīkṣamāṇastallīlāṃ mumude jaraṭho bhṛśam|| 25

अर्थ

वृद्ध अजामिलने अत्यन्त मोहके कारण अपना सम्पूर्ण हृदय अपने बच्चे नारायणको सौंप दिया था। वह अपने बच्चेकी तोतली बोली सुन-सुनकर तथा बालसुलभ खेल देख-देखकर फूला नहीं समाता था॥ २५॥

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