॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.12.7
युयुत्सतां कुत्रचिदाततायिनां
जयः सदैकत्र न वै परात्मनाम्।
विनैकमुत्पत्तिलयस्थितीश्वरं
सर्वज्ञमाद्यं पुरुषं सनातनम्॥ ७
yuyutsatāṃ kutracidātatāyināṃ
jayaḥ sadaikatra na vai parātmanām|
vinaikamutpattilayasthitīśvaraṃ
sarvajñamādyaṃ puruṣaṃ sanātanam|| 7
अर्थ
(देखो—) सर्वज्ञ, सनातन, आदिपुरुष भगवान् ही जगत्की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय करनेमें समर्थ हैं। उनके अतिरिक्त देहाभिमानी और युद्धके लिये उत्सुक आततायियोंको सर्वदा जय ही नहीं मिलती। वे कभी जीतते हैं तो कभी हारते हैं॥ ७॥