ये सब लोक और लोकपाल जालमें फँसे हुए पक्षियोंकी भाँति जिसकी अधीनतामें विवश होकर चेष्टा करते हैं, वह काल ही सबकी जय-पराजयका कारण है॥ ८॥
लोकाः सपाला यस्येमे श्वसन्ति विवशा वशे।
द्विजा इव शिचा बद्धाः स काल इह कारणम्॥ ८
ये सब लोक और लोकपाल जालमें फँसे हुए पक्षियोंकी भाँति जिसकी अधीनतामें विवश होकर चेष्टा करते हैं, वह काल ही सबकी जय-पराजयका कारण है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.12.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 762) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/12/8/