श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

लोकाः सपाला यस्येमे श्‍वसन्ति विवशा वशे।

द्विजा इव शिचा बद्धाः स काल इह कारणम्॥ ८

lokāḥ sapālā yasyeme śvasanti vivaśā vaśe|

dvijā iva śicā baddhāḥ sa kāla iha kāraṇam|| 8

अर्थ

ये सब लोक और लोकपाल जालमें फँसे हुए पक्षियोंकी भाँति जिसकी अधीनतामें विवश होकर चेष्टा करते हैं, वह काल ही सबकी जय-पराजयका कारण है॥ ८॥

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