श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार ब्राह्मणोंसे प्रेरणा प्राप्त करके देवराज इन्द्रने वृत्रासुरका वध किया था। अब उसके मारे जानेपर ब्रह्महत्या इन्द्रके पास आयी॥ १०॥
एवं सञ्चोदितो विप्रैर्मरुत्वानहनद्रिपुम्।
ब्रह्महत्या हते तस्मिन्नाससाद वृषाकपिम्॥ १०
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार ब्राह्मणोंसे प्रेरणा प्राप्त करके देवराज इन्द्रने वृत्रासुरका वध किया था। अब उसके मारे जानेपर ब्रह्महत्या इन्द्रके पास आयी॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.13.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 766) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/13/10/