श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.13.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

हयमेधेन पुरुषं परमात्मानमीश्‍वरम्।

इष्ट्वा नारायणं देवं मोक्ष्यसेऽपि जगद्वधात्॥ ७

hayamedhena puruṣaṃ paramātmānamīśvaram|

iṣṭvā nārāyaṇaṃ devaṃ mokṣyase'pi jagadvadhāt|| 7

अर्थ

अश्‍वमेध यज्ञके द्वारा सबके अन्तर्यामी सर्वशक्तिमान् परमात्मा नारायणदेवकी आराधना करके तुम सम्पूर्ण जगत‍्का वध करनेके पापसे भी मुक्त हो सकोगे; फिर वृत्रासुरके वधकी तो बात ही क्या है॥ ७॥

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