श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.13.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

ब्रह्महा पितृहा गोघ्नो मातृहाऽऽचार्यहाघवान्।

श्वादः पुल्कसको वापि शुद्ध्येरन् यस्य कीर्तनात्॥ ८

brahmahā pitṛhā goghno mātṛhā''cāryahāghavān|

śvādaḥ pulkasako vāpi śuddhyeran yasya kīrtanāt|| 8

अर्थ

देवराज! भगवान्‌के नाम-कीर्तनमात्रसे ही ब्राह्मण, पिता, गौ, माता, आचार्य आदिकी हत्या करनेवाले महापापी, कुत्तेका मांस खानेवाले चाण्डाल और कसाई भी शुद्ध हो जाते हैं॥ ८॥

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