॥ श्रीहरिः ॥
तस्यैकदा तु भवनमङ्गिरा भगवानृषिः।
लोकाननुचरन्नेतानुपागच्छद्यदृच्छया ॥ १४
tasyaikadā tu bhavanamaṅgirā bhagavānṛṣiḥ|
lokānanucarannetānupāgacchadyadṛcchayā || 14
अर्थ
एक दिन शाप और वरदान देनेमें समर्थ अंगिरा ऋषि स्वच्छन्दरूपसे विभिन्न लोकोंमें विचरते हुए राजा चित्रकेतुके महलमें पहुँच गये॥ १४॥
तस्यैकदा तु भवनमङ्गिरा भगवानृषिः।
लोकाननुचरन्नेतानुपागच्छद्यदृच्छया ॥ १४
एक दिन शाप और वरदान देनेमें समर्थ अंगिरा ऋषि स्वच्छन्दरूपसे विभिन्न लोकोंमें विचरते हुए राजा चित्रकेतुके महलमें पहुँच गये॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 769) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/14/14/