श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.26

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ततः पाहि महाभाग पूर्वैः सह गतं तमः।

यथा तरेम दुस्तारं प्रजया तद् विधेहि नः॥ २६

tataḥ pāhi mahābhāga pūrvaiḥ saha gataṃ tamaḥ|

yathā tarema dustāraṃ prajayā tad vidhehi naḥ|| 26

अर्थ

महाभाग्यवान् महर्षे! मैं तो दुःखी हूँ ही, पिण्डदान न मिलनेकी आशंकासे मेरे पितर भी दुःखी हो रहे हैं। अब आप हमें सन्तान-दान करके परलोकमें प्राप्त होनेवाले घोर नरकसे उबारिये और ऐसी व्यवस्था कीजिये कि मैं लोक-परलोकके सब दुःखोंसे छुटकारा पा लूँ॥ २६॥

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