श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.29

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अथाह नृपतिं राजन् भवितैकस्तवात्मजः।

हर्षशोकप्रदस्तुभ्यमिति ब्रह्मसुतो ययौ॥ २९

athāha nṛpatiṃ rājan bhavitaikastavātmajaḥ|

harṣaśokapradastubhyamiti brahmasuto yayau|| 29

अर्थ

और राजा चित्रकेतुसे कहा—‘राजन्! तुम्हारी पत्नीके गर्भसे एक पुत्र होगा, जो तुम्हें हर्ष और शोक दोनों ही देगा।’ यों कहकर अंगिरा ऋषि चले गये॥ २९॥

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