श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.28

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ज्येष्ठा श्रेष्ठा च या राज्ञो महिषीणां च भारत।

नाम्ना कृतद्युतिस्तस्यै यज्ञोच्छिष्टमदाद् द्विजः॥ २८

jyeṣṭhā śreṣṭhā ca yā rājño mahiṣīṇāṃ ca bhārata|

nāmnā kṛtadyutistasyai yajñocchiṣṭamadād dvijaḥ|| 28

अर्थ

परीक्षित्! राजा चित्रकेतुकी रानियोंमें सबसे बड़ी और सद‍्गुणवती महारानी कृतद्युति थीं। महर्षि अंगिराने उन्हींको यज्ञका अवशेष प्रसाद दिया॥ २८॥

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