महामुने! करोड़ों सिद्ध एवं मुक्त पुरुषोंमें भी वैसे शान्तचित्त महापुरुषका मिलना तो बहुत ही कठिन है, जो एकमात्र भगवान्के ही परायण हो॥ ५॥✎ 538539
मुक्तानामपि सिद्धानां नारायणपरायणः।
सुदुर्लभः प्रशान्तात्मा कोटिष्वपि महामुने॥ ५
महामुने! करोड़ों सिद्ध एवं मुक्त पुरुषोंमें भी वैसे शान्तचित्त महापुरुषका मिलना तो बहुत ही कठिन है, जो एकमात्र भगवान्के ही परायण हो॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 768) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/14/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)