परीक्षित्! जिन रानियोंने बच्चेको विष दिया था, वे बालहत्याके कारण श्रीहीन हो गयी थीं और लज्जाके मारे आँखतक नहीं उठा सकती थीं। उन्होंने अंगिरा ऋषिके उपदेशको याद करके (मात्सर्यहीन हो) यमुनाजीके तटपर ब्राह्मणोंके आदेशानुसार बालहत्याका प्रायश्चित्त किया॥ १४॥
बालघ्न्यो व्रीडितास्तत्र बालहत्याहतप्रभाः।
बालहत्याव्रतं चेरुर्ब्राह्मणैर्यन्निरूपितम्।
यमुनायां महाराज स्मरन्त्यो द्विजभाषितम्॥ १४
परीक्षित्! जिन रानियोंने बच्चेको विष दिया था, वे बालहत्याके कारण श्रीहीन हो गयी थीं और लज्जाके मारे आँखतक नहीं उठा सकती थीं। उन्होंने अंगिरा ऋषिके उपदेशको याद करके (मात्सर्यहीन हो) यमुनाजीके तटपर ब्राह्मणोंके आदेशानुसार बालहत्याका प्रायश्चित्त किया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.16.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 780) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/16/14/