श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.15

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

स इत्थं प्रतिबुद्धात्मा चित्रकेतुर्द्विजोक्तिभिः।

गृहान्धकूपान्‍निष्क्रान्तः सरःपङ्कादिव द्विपः॥ १५

sa itthaṃ pratibuddhātmā citraketurdvijoktibhiḥ|

gṛhāndhakūpānniṣkrāntaḥ saraḥpaṅkādiva dvipaḥ|| 15

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार अंगिरा और नारदजीके उपदेशसे विवेकबुद्धि जाग्रत् हो जानेके कारण राजा चित्रकेतु घर-गृहस्थीके अँधेरे कुएँसे उसी प्रकार बाहर निकल पड़े, जैसे कोई हाथी तालाबके कीचड़से निकल आये॥ १५॥

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