श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.19

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नमो विज्ञानमात्राय परमानन्दमूर्तये।

आत्मारामाय शान्ताय निवृत्तद्वैतदृष्टये॥ १९

namo vijñānamātrāya paramānandamūrtaye|

ātmārāmāya śāntāya nivṛttadvaitadṛṣṭaye|| 19

अर्थ

आप विशुद्ध विज्ञानस्वरूप हैं। आपकी मूर्ति परमानन्दमयी है। आप अपने स्वरूपभूत आनन्दमें ही मग्न और परम शान्त हैं। द्वैतदृष्टि आपको छूतक नहीं सकती। मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ १९॥

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