मैं ही समस्त प्राणियोंके रूपमें हूँ, मैं ही उनका आत्मा हूँ और मैं ही पालनकर्ता भी हूँ। शब्दब्रह्म (वेद) और परब्रह्म दोनों ही मेरे सनातन रूप हैं॥ ५१॥✎ 545
अहं वै सर्वभूतानि भूतात्मा भूतभावनः।
शब्दब्रह्म परं ब्रह्म ममोभे शाश्वती तनू॥ ५१
मैं ही समस्त प्राणियोंके रूपमें हूँ, मैं ही उनका आत्मा हूँ और मैं ही पालनकर्ता भी हूँ। शब्दब्रह्म (वेद) और परब्रह्म दोनों ही मेरे सनातन रूप हैं॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.16.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 785) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/16/51/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#545 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने