श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.17.15

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

अतः पापीयसीं योनिमासुरीं याहि दुर्मते।

यथेह भूयो महतां न कर्ता पुत्र किल्बिषम्॥ १५

ataḥ pāpīyasīṃ yonimāsurīṃ yāhi durmate|

yatheha bhūyo mahatāṃ na kartā putra kilbiṣam|| 15

अर्थ

[चित्रकेतुको सम्बोधन कर] अतः दुर्मते! तुम पापमय असुरयोनिमें जाओ। ऐसा होनेसे बेटा! तुम फिर कभी किसी महापुरुषका अपराध नहीं कर सकोगे॥ १५॥

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