जटाधारी, बहुत बड़े तपस्वी एवं ब्रह्मवादियोंके सभापति होकर भी साधारण पुरुषके समान निर्लज्जतासे गोदमें स्त्री लेकर बैठे हैं॥ ७॥
जटाधरस्तीव्रतपा ब्रह्मवादिसभापतिः।
अङ्कीकृत्य स्त्रियं चास्ते गतह्रीः प्राकृतो यथा॥ ७
जटाधारी, बहुत बड़े तपस्वी एवं ब्रह्मवादियोंके सभापति होकर भी साधारण पुरुषके समान निर्लज्जतासे गोदमें स्त्री लेकर बैठे हैं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.17.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 787) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/17/7/