श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.17.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

जटाधरस्तीव्रतपा ब्रह्मवादिसभापतिः।

अङ्कीकृत्य स्त्रियं चास्ते गतह्रीः प्राकृतो यथा॥ ७

jaṭādharastīvratapā brahmavādisabhāpatiḥ|

aṅkīkṛtya striyaṃ cāste gatahrīḥ prākṛto yathā|| 7

अर्थ

जटाधारी, बहुत बड़े तपस्वी एवं ब्रह्मवादियोंके सभापति होकर भी साधारण पुरुषके समान निर्लज्जतासे गोदमें स्त्री लेकर बैठे हैं॥ ७॥

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