श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.15

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

ह्रादस्य धमनिर्भार्यासूत वातापिमिल्वलम्।

योऽगस्त्याय त्वतिथये पेचे वातापिमिल्वलः॥ १५

hrādasya dhamanirbhāryāsūta vātāpimilvalam|

yo'gastyāya tvatithaye pece vātāpimilvalaḥ|| 15

अर्थ

ह्रादकी पत्‍नी थी धमनि। उसके दो पुत्र हुए—वातापि और इल्वल। इस इल्वलने ही महर्षि अगस्त्यके आतिथ्यके समय वातापिको पकाकर उन्हें खिला दिया था॥ १५॥

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