श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.16

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अनुह्रादस्य सूर्म्यायां३ बाष्कलो महिषस्तथा।

विरोचनस्तु प्राह्रादिर्देव्यास्तस्याभवद्बलिः॥ १६

anuhrādasya sūrmyāyāṃ bāṣkalo mahiṣastathā|

virocanastu prāhrādirdevyāstasyābhavadbaliḥ|| 16

अर्थ

अनुह्रादकी पत्‍नी सूर्म्या थी, उसके दो पुत्र हुए—बाष्कल और महिषासुर। प्रह्रादका पुत्र था विरोचन। उसकी पत्‍नी देवीके गर्भसे दैत्यराज बलिका जन्म हुआ॥ १६॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—सूर्यायां।

    (मुद्रित पृष्ठ 793)

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