बलिकी पत्नीका नाम अशना था। उससे बाण आदि सौ पुत्र हुए। दैत्यराज बलिकी महिमा गान करनेयोग्य है। उसे मैं आगे (आठवें स्कन्धमें) सुनाऊँगा॥ १७॥
बाणज्येष्ठं पुत्रशतमशनायां ततोऽभवत्।
तस्यानुभावः सुश्लोक्यः पश्चादेवाभिधास्यते॥ १७
बलिकी पत्नीका नाम अशना था। उससे बाण आदि सौ पुत्र हुए। दैत्यराज बलिकी महिमा गान करनेयोग्य है। उसे मैं आगे (आठवें स्कन्धमें) सुनाऊँगा॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 793) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/17/