दितिके हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षके अतिरिक्त उनचास पुत्र और थे। उन्हें मरुद्गण कहते हैं। वे सब निःसन्तान रहे। देवराज इन्द्रने उन्हें अपने ही समान देवता बना लिया॥ १९॥
मरुतश्च दितेः पुत्राश्चत्वारिंशन्नवाधिकाः।
त आसन्नप्रजाः सर्वे नीता इन्द्रेण सात्मताम्॥ १९
दितिके हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षके अतिरिक्त उनचास पुत्र और थे। उन्हें मरुद्गण कहते हैं। वे सब निःसन्तान रहे। देवराज इन्द्रने उन्हें अपने ही समान देवता बना लिया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 793) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/19/