श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.19

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

मरुतश्‍च दितेः पुत्राश्‍चत्वारिंशन्‍नवाधिकाः।

त आसन्‍नप्रजाः सर्वे नीता इन्द्रेण सात्मताम्॥ १९

marutaśca diteḥ putrāścatvāriṃśannavādhikāḥ|

ta āsannaprajāḥ sarve nītā indreṇa sātmatām|| 19

अर्थ

दितिके हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षके अतिरिक्त उनचास पुत्र और थे। उन्हें मरुद्गण कहते हैं। वे सब निःसन्तान रहे। देवराज इन्द्रने उन्हें अपने ही समान देवता बना लिया॥ १९॥

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