ब्रह्मन्! मेरे साथ यहाँकी सभी ऋषिमण्डली यह बात जाननेके लिये अत्यन्त उत्सुक हो रही है। अतः आप कृपा करके विस्तारसे वह रहस्य बतलाइये॥ २१॥
इमे श्रद्दधते ब्रह्मन्नृषयो हि मया सह।
परिज्ञानाय भगवंस्तन्नो व्याख्यातुमर्हसि॥ २१
ब्रह्मन्! मेरे साथ यहाँकी सभी ऋषिमण्डली यह बात जाननेके लिये अत्यन्त उत्सुक हो रही है। अतः आप कृपा करके विस्तारसे वह रहस्य बतलाइये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 793) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/21/