श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

धातुः कुहूः सिनीवाली राका चानुमतिस्तथा।

सायं दर्शमथ प्रातः पूर्णमासमनुक्रमात्॥ ३

dhātuḥ kuhūḥ sinīvālī rākā cānumatistathā|

sāyaṃ darśamatha prātaḥ pūrṇamāsamanukramāt|| 3

अर्थ

धाताकी चार पत्नियाँ थीं—कुहू, सिनीवाली, राका और अनुमति। उनसे क्रमशः सायं, दर्श, प्रातः और पूर्णमास—ये चार पुत्र हुए॥ ३॥

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