श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अग्नीन् पुरीष्यानाधत्त क्रियायां समनन्तरः।

चर्षणी वरुणस्यासीद्यस्यां जातो भृगुः पुनः॥ ४

agnīn purīṣyānādhatta kriyāyāṃ samanantaraḥ|

carṣaṇī varuṇasyāsīdyasyāṃ jāto bhṛguḥ punaḥ|| 4

अर्थ

धाताके छोटे भाईका नाम था—विधाता, उनकी पत्‍नी क्रिया थी। उससे पुरीष्य नामके पाँच अग्‍नियोंकी उत्पत्ति हुई। वरुणजीकी पत्नीका नाम चर्षणी था। उससे भृगुजीने पुनः जन्म ग्रहण किया। इसके पहले वे ब्रह्माजीके पुत्र थे॥ ४॥

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