श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.49

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

नोच्छिष्टं चण्डिकान्‍नं च सामिषं वृषलाहृतम्।

भुञ्जीतोदक्यया दृष्टं पिबेदञ्जलिना त्वपः॥ ४९

nocchiṣṭaṃ caṇḍikānnaṃ ca sāmiṣaṃ vṛṣalāhṛtam|

bhuñjītodakyayā dṛṣṭaṃ pibedañjalinā tvapaḥ|| 49

अर्थ

जूठा न खाय, भद्रकालीका प्रसाद या मांसयुक्त अन्‍नका भोजन न करे। शूद्रका लाया हुआ और रजस्वलाका देखा हुआ अन्‍न भी न खाय और अंजलिसे जलपान न करे॥ ४९॥

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