॥ श्रीहरिः ॥
पौलोम्यामिन्द्र आधत्त त्रीन् पुत्रानिति नः श्रुतम्।
जयन्तमृषभं तात तृतीयं मीढुषं प्रभुः॥ ७
paulomyāmindra ādhatta trīn putrāniti naḥ śrutam|
jayantamṛṣabhaṃ tāta tṛtīyaṃ mīḍhuṣaṃ prabhuḥ|| 7
अर्थ
प्रिय परीक्षित्! देवराज इन्द्रकी पत्नी थीं पुलोमनन्दिनी शची। उनसे हमने सुना है, उन्होंने तीन पुत्र उत्पन्न किये—जयन्त, ऋषभ और मीढ्वान्॥ ७॥
पौलोम्यामिन्द्र आधत्त त्रीन् पुत्रानिति नः श्रुतम्।
जयन्तमृषभं तात तृतीयं मीढुषं प्रभुः॥ ७
प्रिय परीक्षित्! देवराज इन्द्रकी पत्नी थीं पुलोमनन्दिनी शची। उनसे हमने सुना है, उन्होंने तीन पुत्र उत्पन्न किये—जयन्त, ऋषभ और मीढ्वान्॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 792) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/7/