श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

उरुक्रमस्य देवस्य मायावामनरूपिणः।

कीर्तौ पत्न्यां बृहच्छ्लोकस्तस्यासन् सौभगादयः॥ ८

urukramasya devasya māyāvāmanarūpiṇaḥ|

kīrtau patnyāṃ bṛhacchlokastasyāsan saubhagādayaḥ|| 8

अर्थ

स्वयं भगवान् विष्णु ही (बलिपर अनुग्रह करने और इन्द्रका राज्य लौटानेके लिये) मायासे वामन (उपेन्द्र)-के रूपमें अवतीर्ण हुए थे। उन्होंने तीन पग पृथ्वी माँगकर तीनों लोक नाप लिये थे। उनकी पत्नीका नाम था कीर्ति। उससे बृहच्छ्लोक नामका पुत्र हुआ। उसके सौभग आदि कई सन्तानें हुईं॥ ८॥

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