राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! आपने अभी-अभी पुंसवन-व्रतका वर्णन किया है और कहा है कि उससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं। सो अब मैं उसकी विधि जानना चाहता हूँ॥ १॥
व्रतं पुंसवनं ब्रह्मन् भवता यदुदीरितम्।
तस्य वेदितुमिच्छामि येन विष्णुः प्रसीदति॥ १
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! आपने अभी-अभी पुंसवन-व्रतका वर्णन किया है और कहा है कि उससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं। सो अब मैं उसकी विधि जानना चाहता हूँ॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 801) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/19/1/