॥ श्रीहरिः ॥
एतेन पूजाविधिना मासान् द्वादश हायनम्।
नीत्वाथोपचरेत्साध्वी कार्तिके चरमेऽहनि॥ २१
etena pūjāvidhinā māsān dvādaśa hāyanam|
nītvāthopacaretsādhvī kārtike carame'hani|| 21
अर्थ
साध्वी स्त्री इस विधिसे बारह महीनोंतक—पूरे सालभर इस व्रतका आचरण करके मार्गशीर्षकी अमावास्याको उद्यापनसम्बन्धी उपवास और पूजन आदि करे॥ २१॥
एतेन पूजाविधिना मासान् द्वादश हायनम्।
नीत्वाथोपचरेत्साध्वी कार्तिके चरमेऽहनि॥ २१
साध्वी स्त्री इस विधिसे बारह महीनोंतक—पूरे सालभर इस व्रतका आचरण करके मार्गशीर्षकी अमावास्याको उद्यापनसम्बन्धी उपवास और पूजन आदि करे॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 803) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/19/21/