इसके बाद जब ब्राह्मण प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दें, तो बड़े आदरसे सिर झुकाकर उन्हें स्वीकार करे। भक्तिभावसे माथा टेककर उनके चरणोंमें प्रणाम करे और उनकी आज्ञा लेकर भोजन करे॥ २३॥
आशिषः शिरसाऽऽदाय द्विजैः प्रीतैः समीरिताः।
प्रणम्य शिरसा भक्त्या भुञ्जीत तदनुज्ञया॥ २३
इसके बाद जब ब्राह्मण प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दें, तो बड़े आदरसे सिर झुकाकर उन्हें स्वीकार करे। भक्तिभावसे माथा टेककर उनके चरणोंमें प्रणाम करे और उनकी आज्ञा लेकर भोजन करे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 803) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/19/23/