यद्यपि मैं इस जन्मका महापापी हूँ, फिर भी मैंने पूर्वजन्मोंमें अवश्य ही शुभकर्म किये होंगे; तभी तो मुझे इन श्रेष्ठ देवताओंके दर्शन हुए। उनकी स्मृतिसे मेरा हृदय अब भी आनन्दसे भर रहा है॥ ३२॥
अथापि मे दुर्भगस्य विबुधोत्तमदर्शने।
भवितव्यं मङ्गलेन येनात्मा मे प्रसीदति॥ ३२
यद्यपि मैं इस जन्मका महापापी हूँ, फिर भी मैंने पूर्वजन्मोंमें अवश्य ही शुभकर्म किये होंगे; तभी तो मुझे इन श्रेष्ठ देवताओंके दर्शन हुए। उनकी स्मृतिसे मेरा हृदय अब भी आनन्दसे भर रहा है॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 709) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/32/