श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.35

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सोऽहं तथा यतिष्यामि यतचित्तेन्द्रियानिलः।

यथा न भूय आत्मानमन्धे तमसि मज्जये॥ ३५

so'haṃ tathā yatiṣyāmi yatacittendriyānilaḥ|

yathā na bhūya ātmānamandhe tamasi majjaye|| 35

अर्थ

अब मैं अपने मन, इन्द्रिय और प्राणोंको वशमें करके ऐसा प्रयत्न करूँगा कि फिर अपनेको घोर अन्धकारमय नरकमें न डालूँ॥ ३५॥✎ 498

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #498 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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