श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.38

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ममाहमिति देहादौ हित्वामिथ्यार्थधीर्मतिम्।

धास्ये मनो भगवति शुद्धं तत्कीर्तनादिभिः॥ ३८

mamāhamiti dehādau hitvāmithyārthadhīrmatim|

dhāsye mano bhagavati śuddhaṃ tatkīrtanādibhiḥ|| 38

अर्थ

मैंने सत्य वस्तु परमात्माको पहचान लिया है; अतः अब मैं शरीर आदिमें ‘मैं’ तथा ‘मेरे’ का भाव छोड़कर भगवन्‍नामके कीर्तन आदिसे अपने मनको शुद्ध करूँगा और उसे भगवान्‌में लगाऊँगा॥ ३८॥✎ 499

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #499 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

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