उस देवस्थानमें जाकर वे भगवान्के मन्दिरमें आसनसे बैठ गये और उन्होंने योगमार्गका आश्रय लेकर अपनी सारी इन्द्रियोंको विषयोंसे हटाकर मनमें लीन कर लिया और मनको बुद्धिमें मिला दिया॥ ४०॥
स तस्मिन् देवसदन आसीनो योगमाश्रितः।
प्रत्याहृतेन्द्रियग्रामो युयोज मन आत्मनि॥ ४०
उस देवस्थानमें जाकर वे भगवान्के मन्दिरमें आसनसे बैठ गये और उन्होंने योगमार्गका आश्रय लेकर अपनी सारी इन्द्रियोंको विषयोंसे हटाकर मनमें लीन कर लिया और मनको बुद्धिमें मिला दिया॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 710) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/40/