॥ श्रीहरिः ॥
ततो गुणेभ्य आत्मानं वियुज्यात्मसमाधिना।
युयुजे भगवद्धाम्नि ब्रह्मण्यनुभवात्मनि॥ ४१
tato guṇebhya ātmānaṃ viyujyātmasamādhinā|
yuyuje bhagavaddhāmni brahmaṇyanubhavātmani|| 41
अर्थ
इसके बाद आत्मचिन्तनके द्वारा उन्होंने बुद्धिको विषयोंसे पृथक् कर लिया तथा भगवान्के धाम अनुभवस्वरूप परब्रह्ममें जोड़ दिया॥ ४१॥
ततो गुणेभ्य आत्मानं वियुज्यात्मसमाधिना।
युयुजे भगवद्धाम्नि ब्रह्मण्यनुभवात्मनि॥ ४१
इसके बाद आत्मचिन्तनके द्वारा उन्होंने बुद्धिको विषयोंसे पृथक् कर लिया तथा भगवान्के धाम अनुभवस्वरूप परब्रह्ममें जोड़ दिया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 710) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/41/