॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.3.20
स्वयम्भूर्नारदः शम्भुः कुमारः कपिलो मनुः।
प्रह्रादो जनको भीष्मो बलिर्वैयासकिर्वयम्॥ २०
svayambhūrnāradaḥ śambhuḥ kumāraḥ kapilo manuḥ|
prahrādo janako bhīṣmo balirvaiyāsakirvayam|| 20
अर्थ
भगवान्के द्वारा निर्मित भागवतधर्म परम शुद्ध और अत्यन्त गोपनीय है। उसे जानना बहुत ही कठिन है। जो उसे जान लेता है, वह भगवत्स्वरूपको प्राप्त हो जाता है। दूतो! भागवतधर्मका रहस्य हम बारह व्यक्ति ही जानते हैं—ब्रह्माजी, देवर्षि नारद, भगवान् शंकर, सनत्कुमार, कपिलदेव, स्वायम्भुव मनु, प्रह्लाद, जनक, भीष्मपितामह, बलि, शुकदेवजी और मैं (धर्मराज) ॥ २०-२१॥