श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.23

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नामोच्चारणमाहात्म्यं हरेः पश्यत पुत्रकाः।

अजामिलोऽपि येनैव मृत्युपाशादमुच्यत॥ २३

nāmoccāraṇamāhātmyaṃ hareḥ paśyata putrakāḥ|

ajāmilo'pi yenaiva mṛtyupāśādamucyata|| 23

अर्थ

प्रिय दूतो! भगवान्‌के नामोच्चारणकी महिमा तो देखो, अजामिल-जैसा पापी भी एक बार नामोच्चारण करनेमात्रसे मृत्युपाशसे छुटकारा पा गया॥ २३॥

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