श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.22

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एतावानेव लोकेऽस्मिन् पुंसां धर्मः परः स्मृतः।

भक्तियोगो भगवति तन्‍नामग्रहणादिभिः॥ २२

etāvāneva loke'smin puṃsāṃ dharmaḥ paraḥ smṛtaḥ|

bhaktiyogo bhagavati tannāmagrahaṇādibhiḥ|| 22

अर्थ

इस जगत‍्में जीवोंके लिये बस, यही सबसे बड़ा कर्तव्य—परम धर्म है कि वे नाम-कीर्तन आदि उपायोंसे भगवान्‌के चरणोंमें भक्तिभाव प्राप्त कर लें॥ २२॥

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