इसलिये हम तो ऐसा समझते हैं कि अकेले आप ही समस्त प्राणियों और उनके स्वामियोंके भी अधीश्वर हैं। आप ही मनुष्योंके पाप और पुण्यके निर्णायक, दण्डदाता और शासक हैं॥ ७॥
अतस्त्वमेको भूतानां सेश्वराणामधीश्वरः।
शास्ता दण्डधरो नॄणां शुभाशुभविवेचनः॥ ७
इसलिये हम तो ऐसा समझते हैं कि अकेले आप ही समस्त प्राणियों और उनके स्वामियोंके भी अधीश्वर हैं। आप ही मनुष्योंके पाप और पुण्यके निर्णायक, दण्डदाता और शासक हैं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 712) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/3/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1070 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नृणां → नॄणां