श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्य ते विहतो दण्डो न लोके वर्ततेऽधुना।

चतुर्भिरद्भुतैः सिद्धैराज्ञा ते विप्रलम्भिता॥ ८

tasya te vihato daṇḍo na loke vartate'dhunā|

caturbhiradbhutaiḥ siddhairājñā te vipralambhitā|| 8

अर्थ

प्रभो! अबतक संसारमें कहीं भी आपके द्वारा नियत किये हुए दण्डकी अवहेलना नहीं हुई थी; किन्तु इस समय चार अद्भुत सिद्धोंने आपकी आज्ञाका उल्लंघन कर दिया है॥ ८॥

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