श्रीभगवान्ने कहा—परम भाग्यवान् दक्ष! अब तुम्हारी तपस्या सिद्ध हो गयी, क्योंकि मुझपर श्रद्धा करनेसे तुम्हारे हृदयमें मेरे प्रति परम प्रेमभावका उदय हो गया है॥ ४३॥✎ 512
प्राचेतस महाभाग संसिद्धस्तपसा भवान्।
यच्छ्रद्धया मत्परया मयि भावं परं गतः॥ ४३
श्रीभगवान्ने कहा—परम भाग्यवान् दक्ष! अब तुम्हारी तपस्या सिद्ध हो गयी, क्योंकि मुझपर श्रद्धा करनेसे तुम्हारे हृदयमें मेरे प्रति परम प्रेमभावका उदय हो गया है॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 723) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/43/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#512 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने