परीक्षित्! प्रजापति दक्ष अत्यन्त नम्रतासे झुककर भगवान्के सामने खड़े हो गये। भगवान् सबके हृदयकी बात जानते ही हैं, उन्होंने दक्ष प्रजापतिकी भक्ति और प्रजावृद्धिकी कामना देखकर उनसे यों कहा॥ ४२॥✎ 511
तं तथावनतं भक्तं प्रजाकामं प्रजापतिम्।
चित्तज्ञः सर्वभूतानामिदमाह जनार्दनः॥ ४२
परीक्षित्! प्रजापति दक्ष अत्यन्त नम्रतासे झुककर भगवान्के सामने खड़े हो गये। भगवान् सबके हृदयकी बात जानते ही हैं, उन्होंने दक्ष प्रजापतिकी भक्ति और प्रजावृद्धिकी कामना देखकर उनसे यों कहा॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 722) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/4/42/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)