श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.42

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तं तथावनतं भक्तं प्रजाकामं प्रजापतिम्।

चित्तज्ञः सर्वभूतानामिदमाह जनार्दनः॥ ४२

taṃ tathāvanataṃ bhaktaṃ prajākāmaṃ prajāpatim|

cittajñaḥ sarvabhūtānāmidamāha janārdanaḥ|| 42

अर्थ

परीक्षित्! प्रजापति दक्ष अत्यन्त नम्रतासे झुककर भगवान्‌के सामने खड़े हो गये। भगवान् सबके हृदयकी बात जानते ही हैं, उन्होंने दक्ष प्रजापतिकी भक्ति और प्रजावृद्धिकी कामना देखकर उनसे यों कहा॥ ४२॥✎ 511

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #511 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें