श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.9

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अन्‍नं चराणामचरा ह्यपदः पादचारिणाम्।

अहस्ता हस्तयुक्तानां द्विपदां च चतुष्पदः॥ ९

annaṃ carāṇāmacarā hyapadaḥ pādacāriṇām|

ahastā hastayuktānāṃ dvipadāṃ ca catuṣpadaḥ|| 9

अर्थ

संसारमें पाँखोंसे उड़नेवाले चर प्राणियोंके भोजन फल-पुष्पादि अचर पदार्थ हैं। पैरसे चलनेवालोंके घास-तृणादि बिना पैरवाले पदार्थ भोजन हैं; हाथवालोंके वृक्ष-लता आदि बिना हाथवाले और दो पैरवाले मनुष्यादिके लिये धान, गेहूँ आदि अन्‍न भोजन हैं। चार पैरवाले बैल, ऊँट आदि खेती प्रभृतिके द्वारा अन्‍नकी उत्पत्तिमें सहायक हैं॥ ९॥✎ 507 508

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #507 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #508 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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