श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तत्र नारायणसरस्तीर्थं सिन्धुसमुद्रयोः।

सङ्गमो यत्र सुमहन्मुनिसिद्धनिषेवितम्॥ ३

tatra nārāyaṇasarastīrthaṃ sindhusamudrayoḥ|

saṅgamo yatra sumahanmunisiddhaniṣevitam|| 3

अर्थ

पश्चिम दिशामें सिन्धुनदी और समुद्रके संगमपर नारायण-सर नामका एक महान् तीर्थ है। बड़े-बड़े मुनि और सिद्ध पुरुष वहाँ निवास करते हैं॥ ३॥

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