श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.11

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अहो बत ममासाधु कृतं वै दभ्रबुद्धिना।

यन्मयैश्‍वर्यमत्तेन गुरुः सदसि कात्कृतः॥ ११

aho bata mamāsādhu kṛtaṃ vai dabhrabuddhinā|

yanmayaiśvaryamattena guruḥ sadasi kātkṛtaḥ|| 11

अर्थ

‘हाय-हाय! बड़े खेदकी बात है कि भरी सभामें मूर्खतावश मैंने ऐश्‍वर्यके नशेमें चूर होकर अपने गुरुदेवका तिरस्कार कर दिया। सचमुच मेरा यह कर्म अत्यन्त निन्दनीय है॥ ११॥

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