प्रत्युत्तिष्ठेदिति ब्रूयुर्धर्मं ते न परं विदुः॥ १३
ye pārameṣṭhyaṃ dhiṣaṇamadhitiṣṭhan na kañcana|
pratyuttiṣṭhediti brūyurdharmaṃ te na paraṃ viduḥ|| 13
अर्थ
जो लोग यह कहते हैं कि सार्वभौम राजसिंहासनपर बैठा हुआ सम्राट् किसीके आनेपर राजसिंहासनसे न उठे, वे धर्मका वास्तविक स्वरूप नहीं जानते॥ १३॥
ये पारमेष्ठ्यं धिषणमधितिष्ठन् न कञ्चन।
प्रत्युत्तिष्ठेदिति ब्रूयुर्धर्मं ते न परं विदुः॥ १३
जो लोग यह कहते हैं कि सार्वभौम राजसिंहासनपर बैठा हुआ सम्राट् किसीके आनेपर राजसिंहासनसे न उठे, वे धर्मका वास्तविक स्वरूप नहीं जानते॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 735) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/7/13/