श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.14

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तेषां कुपथदेष्टॄणां पततां तमसि ह्यधः।

ये श्रद्दध्युर्वचस्ते वै मज्जन्त्यश्मप्लवा इव॥ १४

teṣāṃ kupathadeṣṭṝṇāṃ patatāṃ tamasi hyadhaḥ|

ye śraddadhyurvacaste vai majjantyaśmaplavā iva|| 14

अर्थ

ऐसा उपदेश करनेवाले कुमार्गकी ओर ले जानेवाले हैं। वे स्वयं घोर नरकमें गिरते हैं। उनकी बातपर जो लोग विश्वास करते हैं, वे पत्थरकी नावकी तरह डूब जाते हैं॥ १४॥

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