परीक्षित्! दैत्योंको भी देवगुरु बृहस्पति और देवराज इन्द्रकी अनबनका पता लग गया। तब उन मदोन्मत्त और आततायी असुरोंने अपने गुरु शुक्राचार्यके आदेशानुसार देवताओंपर विजय पानेके लिये धावा बोल दिया॥ १८॥
तच्छ्रुत्वैवासुराः सर्व आश्रित्यौशनसं मतम्।
देवान् प्रत्युद्यमं चक्रुर्दुर्मदा आततायिनः॥ १८
परीक्षित्! दैत्योंको भी देवगुरु बृहस्पति और देवराज इन्द्रकी अनबनका पता लग गया। तब उन मदोन्मत्त और आततायी असुरोंने अपने गुरु शुक्राचार्यके आदेशानुसार देवताओंपर विजय पानेके लिये धावा बोल दिया॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 735) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/7/18/