श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.19

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तैर्विसृष्टेषुभिस्तीक्ष्णैर्निर्भिन्‍नाङ्गोरुबाहवः।

ब्रह्माणं शरणं जग्मुः सहेन्द्रा नतकन्धराः॥ १९

tairvisṛṣṭeṣubhistīkṣṇairnirbhinnāṅgorubāhavaḥ|

brahmāṇaṃ śaraṇaṃ jagmuḥ sahendrā natakandharāḥ|| 19

अर्थ

उन्होंने देवताओंपर इतने तीखे-तीखे बाणोंकी वर्षा की कि उनके मस्तक, जंघा, बाहु आदि अंग कट-कटकर गिरने लगे। तब इन्द्रके साथ सभी देवता सिर झुकाकर ब्रह्माजीकी शरणमें गये॥ १९॥

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