स्वयम्भू एवं समर्थ ब्रह्माजीने देखा कि देवताओंकी तो सचमुच बड़ी दुर्दशा हो रही है। अतः उनका हृदय अत्यन्त करुणासे भर गया। वे देवताओंको धीरज बँधाते हुए कहने लगे॥ २०॥
तांस्तथाभ्यर्दितान् वीक्ष्य भगवानात्मभूरजः।
कृपया परया देव उवाच परिसान्त्वयन्॥ २०
स्वयम्भू एवं समर्थ ब्रह्माजीने देखा कि देवताओंकी तो सचमुच बड़ी दुर्दशा हो रही है। अतः उनका हृदय अत्यन्त करुणासे भर गया। वे देवताओंको धीरज बँधाते हुए कहने लगे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 735) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/7/20/